Please share, spread some meaningful and interesting poetry
RAMANATHASWAMY TEMPLE ( VITAL PART OF CHAR DHAM YATRA )
रामनाथस्वामी मंदिर, शैव और वैष्णव दोनों के लिए पवित्र स्थल, जाना जाता एशिया के सबसे लंबे गलियारे, हे स्थित रामेश्वरम द्वीप, दर्शनीय स्थल ,पहाड़ी (गंधमाधना पर्वतम), ऐतिहासिक ( पंबन पुल ) जो जोड़ता इरोमेस्वरम को भारत की मुख्य भूमि हे इसके ही समीप
रहस्य्पूर्ण हे सीता निर्मित 'रामलिंगम' तथा हनुमान द्वारा कैलाश से लाए गए 'विश्वलिंगम' को करना एक साथ प्रतिष्ठित,
22 पवित्र कुंडों के पानी का तापमान अलग-अलग होना और राम सेतु का अस्तित्व हे इसका दिव्य और साक्षात सबूत
पंद्रह एकड़ में फैला हुआ, सदियों से विभिन्न राजवंशों, विशेष रूप से पांड्य, सेतुपति और नायक शासकों द्वारा किया गया विस्तारित,
इसकी विशेषताएं हे द्रविड़ वास्तुकला, जटिल रूप से नक्काशीदार स्तंभ, अठतीस मीटर ऊंचा गोपुरम, ग्रेनाइट की विशाल दीवारें विस्तृत
महाकाव्य रामायण से गहरा नाता इसमें दर्शन किए जाते अक्सर पितृ तर्पण ( पूर्वजों के अनुष्ठान ) और जाने अनजाने किय गये पापों से बचाव,
शीत ऋतु में अपने चरम पर तीर्थयात्री पारंपरिक पूजा से पहले बाइस पवित्र कुओं में स्नान करते, जो विभिन्न पावन जल का करते प्रतिनिधित्व
VIRUPAKSHA TEMPLE ( CENTERPIECE OF THE HAMPI RUINS )
कर्नाटक के हम्पी में स्थित विरुपाक्ष मंदिर एक प्राचीन हिंदू मंदिर है, जिसे यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल का है दर्जा प्राप्त,
तुंगभद्रा नदी से घनिष्ठता से जुड़ा, भारत के सबसे पुराने कार्यरत मंदिरों में से एक, भगवान शिव के रूप विरुपाक्ष को समर्पित
हम्पी में एक प्रमुख पर्यटक आकर्षण, सोलह वर्ग मील के खंडहर क्षेत्र का हिस्सा, सिर्फ यह मंदिर हे राजधानी विजयनगर के खंडहर में सक्रिय,
अपने नौ मंजिला, पचास मीटर ऊंचे पूर्वी गोपुरम के लिए प्रसिद्ध इस मंदिर में जटिल और ऐतिहासिक रूप से हे प्रदर्शन किया गया कला स्थापत्य
प्रमुख संरचनाओं में चित्रित छतों वाला रंग मंडप, तीन मंजिला आंतरिक प्रवेश द्वार और सौ स्तंभों वाला हॉल हैं समाहित,
वास्तुकला का एक उल्लेखनीय उदाहरण, मुख्य मीनार मंदिर परिसर की एक दीवार पर अपना ही प्रतिबिम्ब पड़ता विपरीत
इसका परिसर पत्थर से बना, की एक विशिष्ट विशेषता इसकी अट्टालिका से रथ - शैली की गलियाँ जो हे सीधी रेखा में बिखेर, शुरुआत एक छोटे से पुण्य स्थल से होकर विजयनगर सम्राज्य में इसको केंद्रीय, पवित्र तीर्थस्थल बनाया करके भारी विस्तार
TIRUPATI BALAJI TEMPLE ( ONE OF WORLD’S MOST VISITED & WEALTHIEST SITE )
विश्व के सबसे अधिक देखे जाने वाले और समृद्ध तीर्थ स्थलो में से एक, तिरुपति बालाजी मंदिर आंध्र प्रदेश के तिरुमाला पहाड़ियों पर हे स्थित,
यह द्रविड़ वास्तुकला का उदाहरण, जिसमें मुख्य देवता 'आनंद निलयम' विमान के नीचे विराजमान भगवान विष्णु के अवतार को हे समर्पित
बालाजी या भगवान वेंकटेश्वर को पूजा जाता ब्रह्मांड के रक्षक स्वरुप और देवता जो कलि काल में मनोकामना करते सम्पूर्ण, तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (टीटीडी) तीर्थयात्रीयो का आवास, परिवहन और दर्शन समेत बीड़ा उठाता मंदिर का पर्यवेक्षण
अपनी आध्यात्मिक महत्ता, प्रसिद्ध तिरुपति लड्डू प्रसाद और भक्तों द्वारा अपने बाल अर्पित करने की परंपरा के लिए विख्यात दुनिया भर,
ऐसा माना जाता है कि, भगवान विष्णु कलियुग में यहाँ प्रकट हुए थे, अपने अनुयायियों का मार्गदर्शन करने और ले जाने मोक्ष की ओर
तिरुपति बालाजी की आंखें विभूति (पवित्र राख) से ढकी हुई हे, जो प्रतीक है अंतर्मन पर ध्यान केंद्रित करने ऐवम आध्यात्मिक जुड़ाव,
इस संसार के सबसे अमीर देवालय में प्रमुख, इसके होने से शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक कल्याण पर पड़ता अच्छा खासा प्रभाव
BELUR MATH TEMPLE ( PEACEFUL, SECULAR PILGRIMAGE SITE )
बेलूर मठ पश्चिम बंगाल में हुगली नदी के किनारे स्थित, रामकृष्ण मठ और मिशन का वैश्विक मुख्यालय है मार्टिन एंड बर्न कंपनी द्वारा निर्मित, हिंदू, ईसाई, इस्लामी और बौद्ध शैलियों का मिश्रण, और सभी धर्मों की एकता का प्रतीक, अपनी अनूठी वास्तुकला के लिए हे काफी प्रतिष्ठित
गर्भगृह शांत और सादगीपूर्ण होने के साथ ही प्रतिमा लिए हुए हे श्री रामकृष्ण जो हे तराशी गई इतालवी सफेद संगमरमर, माता के चरणों की पवित्र धूल पूर्वी दीवार पर, नीचे स्थित आयताकार वेदी मध्य में शिव के डमरू के समान है घुमावदार
इसके परिसर में काली माता भी हे, भव्य आयोजन होता वार्षिक दुर्गा पूजा, विवेकानंद जी के गुरु श्री रामकृष्ण परमहंस को हे समर्पित,
भारत में गुरुओं को मुक्ति का मार्गदर्शक और दिव्य ज्ञान का प्रतीक के चलते उनकी तरफ प्रतिबद्ध मंदिर होना नहीं कोई असामान्य बात
शिल्प कला में अद्वितीय, वेदी के ऊपर बने सुंदर चंदोवे का ढांचा, सागौन की लकड़ी से बना हुआ जिस पर संस्कृत में "ओम" हे अंकित,
शांत वातावरण, सुव्यवस्थित उद्यान, पूर्वी और पश्चिमी स्थापत्य की विविधिता समाये हुए यह निर्माण कला में एक नया आयाम करता स्थापित
JAGANNATH TEMPLE ( RENOWED FOR NUMEROUS MYSTERIES )
ओडिशा के पुरी में जगन्नाथ मंदिर बारहवीं शताब्दी का हिंदू मंदिर, भगवान जगन्नाथ ( विष्णु ), बलभद्र और सुभद्रा को है समर्पित,
चार धाम तीर्थ स्थल में एक, इसका सैंतीस हजार वर्ग मीटर बड़ा परिसर मेघनाद पचेरी नामक बीस फुट ऊँची विशाल दीवार से हे सुरक्षित
इसमें प्रवेश करने के लिए दरवाजो की हे चौकड़ी, पूर्व में सिंह, पश्चिम में व्याघ्र, उत्तर में हस्ती ( हाथी ) और दक्षिण में अश्व द्वार, यह पर्यावरणीय अवलोकन ( प्राकृतिक अवरोध ) हे या ऐसा दावा किया जाता कि कोई पक्षी या विमान नहीं उड़ता इसके ऊपर
राजा अनंतवर्मन चोडगंगा देव द्वारा निर्मित, यह कलिंग वास्तुकला, छायाहीन संरचना और सुदर्शन चक्र जैसे रहस्यों के लिए लोकप्रिय,
इसकी त्रिमूर्तियों का लकड़ी से बनना और नवकलेबरा नामक समारोह में हर 12-19 वर्षों में अनुष्ठानिक प्रतिस्थापन हे परंपरा अद्वितीय
आदि शंकराचार्य और चैतन्य महाप्रभु की शिक्षाओं से जुड़े हुए प्रमुख अनुष्ठान में वार्षिक जगन्नाथ रथ यात्रा विश्व भर में हे प्रख्यात,
दुनिया की सबसे बड़ी रसोई में से एक प्रतिदिन हजारों श्रद्धालुओं के लिए भोजन पकाया जाता, प्रवेश केवल हिंदुओं तक हे सिमित
AYODHYA TEMPLE ( AT SACRED BIRTH PLACE OF LORD RAM )
एक सहस्राब्दी से अधिक टिकने के लिए गया निर्मित अयोध्या राम लल्ला को समर्पित,सरयू नदी के किनारे स्थित एक प्रमुख हिंदू मंदिर, इसकी वास्तुकला का श्रेय जाता सोमपुरा परिवार, तीन सौ बानवे स्तंभ और चवालीस द्वार हैं, जिनका निर्माण किया हे गुलाबी बलुआ पत्थर
एक लंबे समय से चले आ रहे धार्मिक और कानूनी विवाद की परिणति का हे प्रतीक, इसलिए इसकी प्रतिष्ठा हे विशिष्ट,
कलात्मक और प्राकृतिक तत्व लिए हुए सफेद मकराना संगमरमर पर फूलों और लताओं की नक्काशी से की हे सजावट
इसके इकहत्तर एकड़ का परिसर सात मंडप का घर समाये हुए हे विभिन्न ऋषियों और देवताओं को प्रतिबद्ध भविष्य की संरचनाएं हे शामिल,
51 इंच की मनमोहक रघुबीर जी की मूर्ति प्रसिद्ध मूर्तिकार अरुण योगीराज, छह महीने की कड़ी मेहनत के बाद काले पत्थर से तराशने में रहे काबिल
राम नवमी के दिन 'सूर्य तिलक' नामक एक (ऑप्टो-मैकेनिकल) प्रणाली के जरिए सूर्य की किरणें रामलला की मूर्ति के मस्तक पर की जाती केंद्रित,
भव्य मंदिर की इस नींव को नमी से सुरक्षा प्रदान करता इक्कीस फुट ऊंचा ग्रेनाइट का चबूतरा, लोहे का उपयोग रहित नागर शैली में किया निर्मित
ISKCON TEMPLE ( ADVOCATES SIMPLE LIVING, HIGH THINKING )
स्वामी प्रभुपाद द्वारा स्थापित इस्कॉन मंदिर,या अंतर्राष्ट्रीय कृष्ण चेतना समाज, भारतीय संस्कृति से जुड़ा और हरे कृष्ण मंत्र के जाप पर केंद्रित
यह वैश्विक गौड़ीय वैष्णव हिंदू संगठन होते हुए भी सभी पृष्ठभूमियों के लोगों का अपने आध्यात्मिक, समुदाय-केंद्रित वातावरण में करता स्वागत
प्रतिदिन होते आयोजित आरती, भगवद गीता की कक्षाएं, वैदिक ज्ञान पर संगोष्ठी और सामुदायिक भोज,
मंगला आरती (सुबह की प्रार्थना) से श्रीगणेश कर भक्त अपना दिन सामुदायिक सेवा में व्यतीत करते हर रोज
न्यूयॉर्क से शुरुआत होकर पश्चिम बंगाल के मायापुर में एक महत्वपूर्ण मुख्यालय,फैले हुए व्यापक रूप, आठ सौ से अधिक हे विश्व भर ,
इसलिए भारतीय ही नहीं विदेशी भी मिशनरी या शिक्षक के रूप में कार्य कर रहे ताकि हो हर जगह "हरे कृष्ण आंदोलन" का प्रचार
शांत वातावरण, उच्च गुणवत्ता वाले शाकाहारी रेस्तरां (गोविंदा का रेस्तरां) शैक्षिक, सांस्कृतिक औरआत्म-ज्ञान सेमिनारों के लिए हे नामचीन,
श्रीमद् भागवतम् पर आधारित, आत्मिकता, चेतना और शांति को काफी बढ़ावा देकर एक सरल, प्राकृतिक जीवन शैली का करता समर्थन