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ARHAR DAL ( ONE OF THE MOST POPULAR & NUTRIENT RICH LEGUMES CONSUMED DAILY )
' तूअर दाल' या अरहर दाल को अंग्रेज़ी में 'स्प्लिट पिजन पीज़' कहते , भारतीय घरों का क्लासिक दैनिक दलहन काफी जाती खाई,
चाहे उबले हुए चावल के साथ परोसी जाये या मसालेदार करी के तौर पर बनाये , मुलायम और क्रीमी हो जाती जब भी पकाई
पौधों से मिलने वाले प्रोटीन का एक बेहतरीन स्रोत, इसमें हे आयरन, कैल्शियम और फ़ोलिक एसिड जैसे ज़रूरी विटामिन और मिनरल,
अधिक उपज प्राप्ति के लिए भारत की विशिष्ट भौगोलिक स्थिति में मानसून शुरू होने से पहले बोई जाती, इसलिए हे खरीफ की फसल
गुलबर्गा जिले को 'कर्नाटक का तुअर बाउल' कहा जाता, क्योंकि यहाँ पर इसका काफी बड़े पैमाने पर उत्पादन होता,
यहाँ से संसाधित करी हुई, हिन्दुस्तान के अन्य क्षेत्रों और राज्यों में वितरित और विपणन की जाती जो होती उच्च गुणवत्ता
कई तरह के व्यंजन बनते इससे जैसे सांभर, सूप और स्टू के अलावा ,इससे तैयार होते तड़के वाली, दाल ढोकली, सिंधी दाल पकवान बेहद स्वादिष्ट,
ऐतिहासिक रूप से इस दाल का इस्तेमाल बारबाडोस में कबूतरों को खिलाने के लिए करते थे, दावा हे इसमें आम दालों में सबसे ज़्यादा होने का फोलेट
BLACK EYED PEAS – LOBIA ( POPULAR WORLDWIDE FOR ITS EARTHY FLAVOUR & PROTIEN CONTENT )
लोबिया जिसे 'ब्लैक-आईड पीज़, 'काउपीज़' ( भारत में 'चौली' या 'रोंगी ) भी कहा जाता, दलहन हे बहुत पौष्टिक और अंडाकार आकार,
मटर परिवार का हिस्सा, जिसकी पहचान काले रंग की आंख से होती, अपने खास स्वाद और प्रोटीन की मात्रा के कारण मशहूर हे दुनिया भर
अमेरिका के दक्षिणी हिस्से में भाग्यशाली और समृद्धि का प्रतीक मानी जाती , जहाँ नए साल के दिन इन्हें खाना थी एक पुरानी परंपरा,
सत्रहवीं सदी में लाखों गुलाम अफ्रीकियों का पेट भरकर, उनके खाने का एक ज़रूरी हिस्सा बनकर , रह चूका मुश्किल समय का सहारा
बेहद ही न्यूट्रिएंट-डेंस, आयरन, जिंक, फोलेट, डाइटरी फ़ाइबर होने के अलावा, हे इसमें ल्यूटिन, केम्फेरोल और क्वेरसेटिन जैसे एंटीऑक्सीडेंट,
अनपॉलिश्ड वैक्यूम-पैक्ड हे एक बेहतरीन सुपरफ़ूड, दिल को सेहतमंद रखता, सहायक हे बाहर निकालने में जमा हुई चर्बी ,टॉक्सिन्स, सेल्युलाइट
चावल, रोटी या पराठे के साथ खानी हो तो हे लोबिया करी, जिसे प्याज़, टमाटर, मसालों के साथ पकाकर एक गाढ़ी, मज़ेदार ग्रेवी जाती बनाई
रंग-बिरंगे सलाद और अनाज से बने भरपूर बाउल तक फैला हुआ, इसकी ताज़ी हरी फलियों को काटकर, सीज़निंग कर डिश तैयार हे स्टिर-फ्राई
MOONG DAL ( STAPLE INGREDIENT IN COMFORT FOODS LIKE KHICHDI & EVERYDAY CURRIES )
अंग्रेज़ी में मूंग दाल को उसके रूप के आधार पर 'मंग बीन' या 'स्प्लिट येलो मंग बीन' कहा जाता, 'विग्ना रेडियाटा नाम से जानी जाती वैज्ञानिक रूप,
आहार फाइबर, शक्तिवर्द्धक,आसानी से पचने वाली, पोषक तत्वों से भरपूर होती, हल्के जायके ,जल्दी पकने की खूबी के लिए पसंद करते फलस्वरूप
कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स, सोडियम, पोटेशियम, कैल्शियम और आयरन सहित, विटामिन ए, सी, बी2, बी3, बी5 और बी6 हे इसमें मौजूद ,
उबली हुई दाल प्याज़, टमाटर, अदरक-लहसुन का पेस्ट के साथ हल्दी, जीरा, धनिया और लाल मिर्च पाउडर में भूने लाने हेतु उम्दा स्वाद
छिलके वाली ( रोज़ाना खाई ) में हरा छिलका बना रहता, जबकि पीली वाली ( खिचड़ी, दाल तड़का ) में उसका छिलका हटा दिया जाता,
पहले वाली में डाइटरी फ़ाइबर ज़्यादा, बढ़िया हे वज़न घटाने हेतु , जबकि दूसरी में प्रोटीन हे काफी, शरीर जिसे आसानी से सोख लेता
अंकुरित न्यूट्रिशनल प्रोफ़ाइल बना देता बेहतर , क्यूंकि एंटीऑक्सीडेंट और ग्लूकोरैफेनिन जैसे एंजाइम कोशिकाओं की करते हिफाज़त,
हम मनुष्य के लिए इसमें ल्यूसीन, आइसोल्यूसीन, वैलीन और लाइसिन जैसे अत्यंत आवयश्क अमीनो एसिड होते, जो हे बाह्य स्रोत-आधारित
BLACK GRAM – URAD DAL ( RICH IN PLANT BASED PROTEIN, DIETARY FIBER & ESSENTIAL MINERALS )
उड़द दाल को अंग्रेज़ी में 'ब्लैक ग्राम, वैज्ञानिक भाषा में 'विग्ना मुंगो' कहते, दक्षिण एशियाई खाने में लोकप्रिय, हे पोषक तत्वों से भरपूर,
इसका इस्तेमाल दाल मखनी जैसी मलाईदार ,स्वादिष्ट, ढाबा स्टाइल से पकाने में, या फिर इसे फर्मेंट करके तैयार होता इडली, डोसा का बैटर
डीप-फ्राई करके मेदु वड़े, पकोड़े, बिरी दंतिकिली जैसे क्रिस्पी स्नैक्स पेश करे या फिर आटे में पीसकर बनाये और आनंद ले कुरकुरे पापड़, इसमें ज़रूरी मिनरल्स होने से एनर्जी मेटाबॉलिज़्म बढ़ता ऐवम हड्डियाँ सशक्त होती, डायबिटीज़, वज़न घटाने के लिए भी एक फ़ायदेमंद फ़ूड
काली साबुत उड़द हे बिना छिलका उतारे, काली छिलके वाली धुली उड़द दाल को आधा तोड़ते, उड़द दाल छिलका हे क्रीमी, हल्के सफेद कलर,
शाकाहारियों, वीगन लोगों के लिए मांसपेशियों की मरम्मत हेतु बढ़िया प्रोटीन सोर्स, गट माइक्रोबायोम को संतुलित रखती, पाचन को बनाती बेहतर
दाल का पेस्ट घरेलू नुस्खे के तौर पर नेचुरल एक्सफोलिएंट, रंगत निखारने, दाग-धब्बे कम करने, बालों की जड़ों को मज़बूत बनाने में मदद करता,
इसका पौधा, जिस मिट्टी में उगता ,उसे उपजाऊ बनाता, इनकी जड़ों की गांठों में ऐसे बैक्टीरिया होते, जो नाइट्रोजन खींचकर खाद में बदल देता
KABULI CHANA ( NUTRIENT – DENSE, INCREDIBLY VERSATILE DUE TO CREAMY TEXTURE, MILD, NUTTY FLAVOUR )
काबुली चना को अंग्रेज़ी में कहते हे ' चिकपीस ' या अमेरिका में 'गारबान्ज़ो बीन्स', जो होते हल्के रंग और बड़े आकार,
18वीं शताब्दी में अफगानिस्तान से भारत लाया गया था ', ये दाने कई तरह से इस्तेमाल किए जाते, मशहूर हे दुनिया भर 'क्लाइमेट-स्मार्ट फसल, कम उपजाऊ, वर्षा आधारित मिट्टी में भी आसानी से उग जाता , भूमि की उर्वरता शक्ति में वृद्धि करता,
देसी चने के पौधे में बैंगनी रंग के फूल आते हैं, जबकि काबुली चने में सफेद रंग के फूल खिलते, और यह बिल्कुल सीधा बढ़ता
यह पोषक तत्वों का खज़ाना है जो मांसपेशियों को बनाने, दिल की सेहत और ब्लड शुगर को कंट्रोल करने के लिए है प्रभावकारी बहुत, प्लांट-बेस्ड प्रोटीन, डाइटरी फ़ाइबर, पोटैशियम, आयरन, फोलेट जैसे ज़रूरी मिनरल्स होने से प्रदान करता डाइट हेल्दी और संतुलित
इसका उपयोग करते बनाने में स्वादिष्ट 'हम्मस', 'फलाफेल', छोले-भटूरे, छोले मसाला, रोस्टेड स्नैक्स, सलाद, कुरकुरी टिक्की, कचौरी, चाट,
काला चना छोटा ( छह से आठ मिलीमीटर ) गहरा भूरा रंग, जबकि बड़ा ( दस से चौदह मिलीमीटर ) क्रीम रंग का चिकना होता ऊपरी कोट
KIDNEY BEANS – RAJMA ( HIGHLY NUTRITIOUS, SCIENTIFICALLY KNOWN AS PHASEOLUS VULGARIS )
किडनी बीन्स पोषक तत्वों से भरपूर फलियां हैं, जिनका नाम पड़ा हे इंसानी किडनी (गुर्दे) जैसी दिखने वाली इसकी बनावट,
हे यह विश्व भर में पसंदीदा ,कारण इसमें हे प्रचुर ज़रूरी मिनरल्स प्लांट-बेस्ड प्रोटीन, डाइटरी फाइबर और आयरन व फोलेट
रेड राजमा हे आम किस्म, ऊपरी परत चमकदार,गहरा रक्तिम ,जबकि व्हाइट ( कैनेलिनी बीन्स ) क्रीमी, नटी, हल्के लाल, चित्तीदार,
कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स सहायक ब्लड शुगर मैनेजमेंट, दिल रखता तंदुरस्त, क्यूंकि हे कोलेस्ट्रॉल फ्री, पोटैशियम, मैग्नीशियम से भरपूर
कच्चे में होता ' फाइटोहेमागग्लूटीनिन ' टॉक्सिन ,अत: इसकी कोई डिश बनाने से पहले आठ घंटे भिगोकर, छह - सात सीटी लेकर पूरी तरह ले उबाल, मसालेदार स्वाद बखूबी लेता सोख, मीट की मात्रा बढ़ाने, गाढ़े स्टू, चिली में उपयोग करने के अलावा, लोकप्रिय उत्तर भारतीय व्यंजन हे राजमा चावल
वैसे तो इसकी उत्पत्ति हजारों साल पहले हुई थी पेरू और मध्य अमेरिका में, परन्तु आज यह हिंदुस्तान, नेपाल के खानपान में रखता विशेष महत्व,
इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स हे एंटी एजिंग, जिंक और बायोटिन होने से केराटिन बनाने और बालों की जड़ों को मज़बूत करने के लिए हे ज़रूरी तत्व
QUINOA ( A HIGHLY NUTRITIOUS, GLUTEN – FREE SEED, INDIGENOUS TO SOUTH AMERICA, PERFECT PROTIEN SOURCE FOR VEGETARIANS & VEGANS )
क्विनोआ दक्षिण अमेरिका का मूल बीज दलिया और चावल का बेहतरीन स्वस्थ विकल्प, जिसे माना जाता हे सुपरफूड,
ग्लूटेन-मुक्त, संपूर्ण प्रोटीन के अलावा, मांसपेशियां बनाने, ऊर्जा देता भरपूर , हे इसमें नौ आवश्यक अमीनो एसिड ' सैपोनिन ' नाम का एक प्राकृतिक कड़वा रसायन, जो पौधे को बचाता कीटो से, होता इसके दानो के बाहरी आवरण ,
नासा द्वारा अंतरिक्ष यात्रियों के भोजन के लिए इस पर काफी शोध किया हे, कारण लंबे अभियानों में आसान पोषण
एक ग्रेन यह 'अमरंथ' परिवार का पौधा, है एक प्रकार का बीज स्यूडोसीरियल जिसको अनाज के रूप में खाया जाता ,
चिनोपोडियम क्यूनाओ, उच्च फाइबर, कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स और कैलोरी होती , जिससे पेट लंबे समय तक भरा रहता
तीन मुख्यत: रंगो में, काले का स्वाद हल्का मीठा होता, सफेद ( सामान्य प्रकार ) को कहते आइवरी, लाल मुश्किल से ही मिलता बाजार,
लगातार सेवन करने से स्किन की कोमलता और निखार, बालो की ग्रोथ कायम रहती, पथरी, ऑस्टियोपोरोसिस, एनीमिया, को रखता दूर