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FENUGREEK LEAVES ( A VERSATILE PLANT USED AS LEAFY GREEN VEGETABLE, DRIED HERB & SPICE )
मेथी के पत्ते, जिन्हें फेनुग्रीक के पत्ते भी कहते ,का उपयोग व्यंजनों में व्यापक रूप से किया जाता ,पत्तेदार हरी सुगंधित बूटी हे जड़ी,
विशिष्ट, हल्का कड़वा जैसा इसका स्वाद, हे तो पोषक तत्वों और खनिजों से भरपूर , पर थोड़ी सी नुकाने में भी एक घंटे घूम जाती घड़ी
इसकी उत्पति मध्य पूर्व और भूमध्यसागरीय क्षेत्र में मानी जाती, खेती शुरू हुई, 4000 ईसा पूर्व के आसपास अनुसार ऐतिहासिक सबूत, आज इसका मसाला दुनिया भर में उगाया जाता, भारत में ही अकेले राजस्थान में देश के कुल उत्पादन का 80% से अधिक होता उत्पादित
इसकी पत्तियां आलू मेथी जैसी सूखी सब्ज़ियों या मेथी पुलाव जैसे चावल का आधार होती हैं, इसका पराठा भी बन सकता टेस्टी और करारा,
सूखी ( कसूरी मेथी ) अपनी तीव्र सुगंध, अरोमा के चलते और भी लजीज कर ,आकर्षक लुक देती यह बटर चिकन, दाल, मलाईदार करी रेस्तरां
अच्छी सेहत बरकरार रखने के कई फायदे, करती यह रक्त शर्करा नियंत्रण, हार्ट को हेल्थी, अपच, पेट संबंधी समस्याओं से दिलाती राहत,
यही नहीं इनके एंटीऑक्सीडेंट, सूजनरोधी गुण वरदान हे स्वस्थ त्वचा, इसके दाने बालों की ग्रोथ के लिए सहायक, वजन को भी करते नियंत्रित
PUMPKIN ( CULTIVATED GLOBALLY FOR FOOD, DECORATION & LIVESTOCK )
कद्दू एक बेहद पौष्टिक और कम कैलोरी वाली सब्जी, जिसे हिंदुस्तान में सीताफल, काशीफल भी कहते हे सेहत के लिए फायदेमंद,
इसके बीज जिंक, आयरन, ट्रिप्टोफेन और मैग्नीशियम से भरपूर होते, जो मूड को अच्छा कर, मददगार हे लाने में गहरी व सुकून भरी नींद
मीठे स्वाद के कारण कस्टर्ड, पाई और पैनकेक में हे इस्तेमाल लायक, नमकीन व्यंजन जैसे सब्ज़ी, सांभर में भी उम्दा, आसानी से शामिल करे आहार, पोटेशियम, फाइबर, एंटीऑक्सीडेंट भरपूर, खराब कोलेस्ट्रॉल कम कर, धमनियों में प्लाक बनने से रोकने में मदद कर ह्रदय स्वास्थ्य को बनाये बेहतर
यह उत्तर भारतीय भंडारे का एक अभिन्न, प्रतिष्ठित हिस्सा , इसे पारंपरिक रूप से गरमागरम, तली हुई पूरियां आलू की सब्जी के साथ जाता परोसा,
बनाने का तरीका भले ही एक हो परन्तु इसे अलग अलग नाम से परोसने के पीछे बेहद दिलचस्प कहानी हे जो सदियों से हमारे समाज का रही हे हिस्सा लंबी, लतानुमा बेलों पर उगते, चौड़ी पत्तियों, आमतौर पर होती मोटी, धारीदार, नारंगी या पीले रंग की बाहरी परत और तना होता लकड़ी जैसा कठोर ,
मानक किस्मों का वजन हे चार से आठ किलोग्राम ,लेकिन विशाल का नौ सौ किलो से भी ज्यादा, जिसको काटने के लिए चाहिए बिजली का औजार
SARSO KA SAAG ( POPULAR NUTRIENT RICH PRIMARILY OF FRESH MUSTARD GREENS )
सरसों का साग एक पौष्टिक, स्वादिष्ट, उत्तर भारत का सेहत का खजाना लिए हुए सर्दियों में खाया जाता , मक्के की रोटी और मक्खन हे इसके साथी,
लहसुन, अदरक, हरी मिर्च, प्याज, टमाटर का लगाया जाता इसमें तड़का, मुख्य घटक हे, सरसों की पत्तियां, पालक, बथुआ और कभी-कभी मेथी
हर साल दिसंबर आते ही जैसे ही ठंडी हवाएं चलनी शुरू होती हैं, पंजाबी रसोई में महक गूंजने लगती साग की सरसो ,
यह सिर्फ एक व्यंजन नहीं हे , बल्कि एक परंपरा की कहानी हे माँ के हाथ के प्यार, पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही बरसो
साग को काट कर, उबला जाता, फिर धीमी आंच पर पकाकर, हो जाती यह गाढ़ी करी, कई तरीके से संतुलित की जाती इसकी कड़वाहट ,
विटामिन, खनिज में आयरन, कैल्शियम और एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर, हड्डियों को मजबूत करते और शरीर को देते प्राकर्तिक गर्माहट
मलाईदार, इसका सेवन आंखों और हृदय के स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाले गुण, पाचन क्रिया को सही रखता ,
सिल-बट्टे पर पीसे गए मसालों की खुशबू और मिट्टी के चूल्हे का धुआं मिलकर, जो जादू भरते थे आज के आधुनिक कुकर में नहीं मिल पाता
GREEN PEAS ( HIGHLY NUTRITIOUS COOL SEASON LEGUMES )
मटर एक बहुत ही लोकप्रिय और पौष्टिक फलीदार सर्दियों के मौसम में सबसे ज्यादा उपभोग की जाती , पिसम सैटिवम हे वानस्पतिक नाम,
एक-दूसरे से जुड़ने का सबसे अच्छा समय, गपशप करते हुए, एक किलो छिलने के बाद भी सिर्फ दो मुठी भर निकालने का हो पाता काम फूल धारण करने वाला यह द्विबीजपत्री, शाकीय पौधा है, पत्ती होती संयुक्त जिसकी जड़ में गांठे मिलती हे, और खोखला होता हे तना , 1 वर्षीय पादप उत्पत्ति उत्तर-पश्चिम भारत के उप-हिमालयी मैदानों में हुई, सौ से तीन सौ साठ मिलीग्राम के बीच वजन होता इसका एक दाना
मीठे स्वाद और कोमल बनावट के लिए सराहे जाने के साथ ही , हे प्रमुख स्रोत लाने का विभिन्न व्यंजनों में प्रोटीन, फाइबर और चटख रंग
पुलाव, पैटीस ,आलू गोभी में ऐसे छुपकर बैठती, जैसे सरकारी दफ्तर में कोई कर्मचारी अपनी सीट से गायब हो , हे इस पर मजेदार व्यंग
झाड़ो में यह जितनी सस्ती और बेहिसाब मिलती , रसोई में उतनी ही 'इज्ज़त' कम की जाती, उस समय कई सब्जियों में इसे करना पड़ता शामिल,
पर समोसे में डालने पर उसको बना दे शाही, जब प्लेट में इसके दाने ढूंढ़ने पड़े तो लगता बोर्ड परीक्षा से भी ज्यादा मेहनत कराने के हे यह काबिल
ARBI ( TARO ROOT RECOGNIZED BY ROUGH BROWN SKIN & CREAMY WHITE FLESH )
अरबी कई आवयश्क विटामिन और पौष्टिक लाभों से भरपूर , स्टार्चयुक्त जड़ वाली सब्जी, हे इसकी घनी, रेशेदार बनावट,
करी, फ्राई और चिप्स के लिए पोटैटो के बजाय, हे मधुमेह रोगियों के लिए न सिर्फ स्वास्थ्यवर्धक विकल्प हे, बल्कि स्वादिष्ट
इसका उपयोग करी, स्नैक्स और साइड डिश में व्यापक रूप से किया जाता ,स्टार्चयुक्त, हल्की मिठास, घना हे टेक्सचर
कैल्शियम ऑक्सालेट को निष्क्रिय करने और इसके चिपचिपे म्यूसिलेज को हटाने के लिए इसे अच्छी तरह से पकाये जरूर
इसको आमतौर पर उबालकर, छीलकर, हल्दी, अजवाइन, मिर्च पाउडर जैसे मसालों के साथ हल्का तला जाता, छोटी या बड़ी,
इसकी पत्ते भी खाने योग्य होते हैं और यह भी प्रयुक्त होते लोकप्रिय व्यंजन बनाने में जैसे पटोड़े या तारो लीव्स की पकोड़ी
कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स होने से ,ग्लूकोज को धीरे-धीरे पचाता, वेट मैनेज करने में सहायक क्यूंकि आलू की तुलना में दोगुने से अधिक हे फाइबर,
मौसमी संक्रमणों से सुरक्षित कर, विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट की उच्च मात्रा मदद करती हानिकारक फ्री रेडिकल्स को करने में बेअसर
GINGER ( GLOBALLY USED AS A CULINARY SPICE & TRADITIONAL MEDICINE )
एक फूल वाला पौधा है, अपने पैने और चरपरे स्वाद के लिए अत्यधिक मूल्यवान जो जिंजरोल जैसे जैवसक्रिय यौगिकों से आता हे अदरक,
एंटीऑक्सीडेंट और सूजनरोधी स्वास्थ्य गुणों के लिए प्रसिद्ध, विश्व स्तर पर पाक मसाले और पारंपरिक औषधि के रूप में किया जाता व्यापक
हे यह दुनियाभर के व्यंजनों का एक अभिन्न अंग , सेवन कई रूपों में किया जाता, जिनमें से प्रत्येक का अपना एक अलग अलग होता टेस्ट,
मॉर्निंग हो या मोशन सिकनेस के उपचार में अत्यधिक प्रभावी पाचक एंजाइमों को उत्तेजित कर, मदद करता जल्दी खाली कराने में पेट
करी, फ्राई और मैरिनेड में तीखापन और मिर्च जैसा जायका जोड़ती, मिठाइयों में उपयोग की जाती, वही गर्म पानी में उबालकर चाय बनती सुगंधित, उष्णकटिबंधीय बारहमासी जड़ी-बूटी वाला पौधा हे, दक्षिणपूर्व एशिया में हुई उत्पति, इस समय प्रमुख उत्पादक हे इंडोनेशिया, नेपाल, चीन, भारत
बीजों के बजाय अपने प्रकंद के माध्यम से प्रजनन करता, अत: एक विशेष रूप से खेती की जाने वाली फसल है जो जंगली अवस्था में नहीं हे उपस्थित,
इसकी जड़ कम कैलोरी वाली जड़ी बूटी, उपयोग वैकल्पिक चिकित्सा में लंबे समय से हो रहा, तंदुरुस्ती के लिए फायदे एक दो नहीं बल्कि अनगिनित
RADISH ( HIGHLY PRIZED FOR ITS CRUNCHY TEXTURE & PEPPERY FLAVOUR )
मूली ब्रासिकासी ( सरसों ) परिवार की तेजी से बढ़ने वाली, खाने योग्य जड़ वाली सब्जी, हे इसकी कई तरह की आकृति और आकार,
रैफानस सैटिवूस वानस्पतिक नाम लाल, सफेद, बैंगनी और काले रंग में आने वाली पसंद की जाती कुरकुरेपन, तीखे, स्वाद मसालेदार
उत्कृष्ट आहार विकल्प, जिसमे कैलोरी बिलकुल न के बराबर, लेकिन पोषक तत्व ( विटामिन सी, पोटेशियम, फोलेट, कैल्शियम ) से होती भरपूर,
इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट और आइसोथियोसाइनेट पाचन क्रिया में सहायक, रक्तचाप को कम करने, लिवर/किडनी की बेहतरी के लिए हे कारगर
गर्मियों की चालीस से पैंतालीस दिन में ही पककर तैयार हो जाती, जो किसानों के लिए हे मुनाफे का सौदा, जबकि शीत ऋतु की लेती वक़्त ज्यादा,
छोटे, गोल कंद हो या सफेद डाइकॉन जैसी बड़ी, लंबी, यह कच्चे सलाद और गरमागरम व्यंजनों दोनों के लिए एक सामग्री है बहुमुखी और उम्दा
आपके दैनिक तरल पदार्थ के सेवन को बढ़ाने का एक शानदार तरीका, लगभग पूरी पानी से बनी होती , इसलिए रखती यह हाइड्रेट काली मूली का रस पित्त की पथरी से छुटकारा दिला सकती, जबकि सफेद मूली का अर्क लिवर को बचाता होने से हेपेटोटॉक्सिसिट