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GHEWAR ( NOT JUST A TRADITION BUT AN EMOTION PASSED THROUGH GENERATIONS )
एक डिस्क के आकार की राजस्थानी स्वादिष्ट मिठाई, जिसकी बनावट मधुमक्खी के छत्ते जैसी होती हे घेवर,
इसे मैदे और घी के घोल को गर्म घी में थोड़ा-थोड़ा करके डाला जाता है, जिससे इसमें संरचना बनती जालीदार सावन के मानसून मौसम में स्वास्थ्य और खुशी के प्रतीक के रूप में खाया जाता, पारंपरिक रूप से जुड़ा हे तीज और रक्षाबंधन जैसे त्योहार, तत्काल ऊर्जा प्रदान कर, शरीर को ठंडक पहुंचा, ब्लड सर्कुलेशन में सुधार कर, हेल्दी हार्ट का समर्थन करता और एसिडिटी को करे दूर सदियों पहले, राजपूत राज्यों के कुशल रसोइयों ने महाराजाओं के लिए, विशेष रूप से उनके राजसी भोज , तैयार किया यह जटिल व्यंजन, जयपुर हे इसका प्रधान गतंव्य , अपने गहरे शाही इतिहास के कारण , खास तौर पर भेजी जाती मायके से सिंधारा सजा रूप में शगुन
मुख्य रूप से रबड़ी, मलाई और मावा/खोया, केसर, प्लेन में उपलब्ध, ड्राई फ्रूट, चॉकलेट और रेड वेलवेट जैसे आधुनिक प्रकार भी हे शामिल
मास्टर शेफ संजीव कपूर इसके प्रशंसक, इसको गिफ्ट करना सिर्फ परंपरा नहीं, बल्कि भाई-बहन के अटूट बंधन की झलक दर्शाने के काबिल
JALEBI ( COMMON SWEET SNACK IN INDIAN SUBCONTINENT )
जलेबी जिसे "जलाबिया' भी कहते नाश्ते में सबसे ज्यादा बिकने वाली मिठाई, जानी जाती हे गोल, टेढ़े-मेढ़े आकार, खस्तापन, रसीले स्वाद
पर्शिया में उत्पति होकर यह इंडिया के उपमहाद्वीप आई, हिन्दुस्तान ही नहीं बल्कि पाकिस्तान, नेपाल और बांग्लादेश में भी की जाती है बेहद पसंद
उत्सवों में और भारतीय पाकिस्तानी शादियों में यह मिष्ठान हे काफी लोकप्रिय, आम तौर पर लाइव फ़ूड काउंटर पर रबड़ी के साथ जाती परोसा
विशेष तौर से साउथ एशिया, मिडिल ईस्ट में प्रसिद्ध, जल तत्व अधिक होने के कारण इसका ऐसा नाम पड़ा कॉम्बो हे इसके फाफड़ा , पोहा, समोसा
भारतीय सिरप-कोटेड मिठाई" अंग्रेजी में इसे स्वीट प्रेट्ज़ेल " या "कॉइल्ड फनल केक" कहा जाता, पसंदीदा मीठा भगवान राम,
इंस्टेंट एनर्जी प्रदान करती इसको गर्म दूध के साथ लेने से इम्युनिटी बूस्ट होती , सिरदर्द, माइग्रेन, खाँसी, जुकाम में मिलता आराम
इसका बाहरी भाग कुरकुरा होता, और अंदर का भाग नरम और रसपूर्ण होता, चबाने पर चाशनी से भर जाता, हे इसकी विशेषता काफी विशिष्ट,
पनीर, खोये से भी बनती मैदा के घोल को गरम घी/तेल में तलकर और फिर चाशनी में डुबोकर बनाते, देखने में इमरती की भी ऐसी ही हे बनावट
LADDOO ( ENJOYED ACROSS ALL AGES, ” MOTHER OF ALL SWEETS ” )
लड्डू जो बेसन, गेहूं या सूजी के आटे, बूँदी, नारियल, तिल से बनाये जाते , कई प्रकार के होते और सभी गोलाकार,
गोंद के लड्डू प्रसवोत्तर पोषण के लिए होते देसी घी, मेवे और प्राकृतिक मीठे पदार्थों से बने यह होते ऊर्जा से भरपूर
गणेश चतुर्थी, रक्षा बंधन, मकर संक्रांति की खास मिठाई होने के अलावा यह आंध्र प्रदेश के तिरुमाला तिरुपति मंदिर में भी हे प्रसिद्ध प्रसाद, बनावट इतनी मुलायम की मुंह में तुरंत घुल जाता इस्तेमाल की गई सामग्रियों के आधार पर इसका मक्खन या अखरोट जैसा हो सकता स्वाद
इसमें मुख्य इंग्रेडिएंट को घी में खुशबू आने तक भूना जाता, फिर उसमें मीठे पदार्थ और ड्राई फ्रूट मिश्रित कर दिया जाता हे आकार राउंड,
आयुर्वेद के मूलभूत ग्रंथ के लेखक महर्षि सुश्रुत इसके जनक लगभग पाँच हजार साल पहले इसको बनाया, मिलाकर तिल, शहद, जड़ी-बूटिया, गुड़
यह किसी प्रिजर्वेटिव के लंबे समय तक खराब नहीं होते, कई तरह के फाइबर और आयरन युक्त बढ़ाते रोग प्रतिरोधक क्षमता,
इसकी वैरायटी की लिस्ट हे अत्यंत लम्बी, भारतीय मिठाई का एक प्रतिष्ठित गेंदाकर रूप प्रतीक हे उत्सव, शुभता और एकता
PEDA ( POPULAR FESTIVE DELICACY, MAINLY FOR RELIGIOUS OFFERINGS )
एक पारंपरिक, अर्ध-नरम भारतीय दूध आधारित मिठाई है, जिसे आमतौर पर त्योहारों पर प्रसाद के रूप में या मिठाई के रूप में जाना जाता हे पेड़ा,
इसकी उत्पत्ति उत्तर प्रदेश के मथुरा में हुई, जो गहरे भूरे रंग और कैरेमल जैसी बनावट के लिए हे प्रसिद्ध जहाँ इसे भगवान कृष्ण से गया हे जोड़ा
पेड़ा अक्षर का उपयोग सामान्य रूप से किसी भी कोमल वस्तु के लिए किया जाता, जिसका गोल हे आकार ,
राजस्थान के झुंझुनूं जिले में स्थित चिड़ावा के पेड़े अपनी शुद्धता और अनूठे स्वाद के लिए हे काफी मशहूर
इसे खोआ या दूध, चीनी और इलायची, केसर या पिस्ता जैसे स्वाद बढ़ाने वाले पदार्थों को गाढ़ा होने तक पकाकर, किया जाता है तैयार,
ऊर्जा, कैल्शियम और प्रोटीन प्रदान करता मेवे (पिस्ता) या इलायची जैसी टॉपिंग अक्सर इसे डिब्बों में भरकर दिया जाता है स्वरुप उपहार
हड्डियों के स्वास्थ्य में मददगार धारवाड़ पेड़ा और केसर पेड़ा भी हे शामिल, यह थकान को भी करता कम,
इस मिठाई का मूल संस्कृत शब्द "पिण्डक हे, पेढा, पेंडा (गुजराती में), पेरा और पिन्नी हे इसके अन्य नाम
GAJAR KA HALWA ( BLEND OF CARROTS & CREAMY TEXTURE LEAVES CRAVING FOR MORE )
गाजर का हलवा एक स्वादिष्ट, मलाईदार और गरमा गरम भारतीय गाजर की खीर है, बनाया जाता सर्दियों और दिवाली जैसे त्योहार
कद्दूकस कर गाजर को धीमी आंच पर गाढ़ी, कैरेमलाइज्ड होने तक पकाया जाता, परोसा जाता इसे काजू, बादाम और पिस्ता से सजाकर
गर्म तासीर का ये विटामिन ए, और फाइबर से भरपूर, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाती , पाचन क्रिया में करती सुधार,
बीटा-कैरोटीन और लाइकोपीन जैसे एंटीऑक्सीडेंट का एक उत्कृष्ट स्रोत, बनाता त्वचा का रंग एक समान और चमकदार
सबसे पहले मुगल काल में प्रचलन में आया था हे यह पंजाब क्षेत्र का एक बहुत ही हे प्रसिद्ध व्यंजन पारंपरिक,
एयरटाइट कंटेनर में भरकर, फ्रीजर में स्टोर कर, खोया/घी आधारित बनाने पर लम्बे समय तक खाने रहता लायक
आमतौर पर जाड़ो में घर पर ही इसे करते तैयार, अन्य नाम हे इसके गजोरर हलवा, गाजरनो हलवो, गाजर पाक और कैरेट पुडिंग,
नरम लाल कैरेट, फुल-फैट दूध का इस्तेमाल करें, इलायची, किशमिश , केसर से गार्निश कर स्वाद और लुक दोनों ही हो जाते आउटस्टैंडिंग
MYSORE PAK ( ROYAL SWEET OF MYSORE )
कर्नाटक की एक प्रसिद्ध दक्षिण भारतीय मिठाई है, जिसे 19वीं शताब्दी में शेफ काकासुरा मदप्पा ने मैसूर पैलेस में बनाया था हे मैसूर पाक,
इसे शुभ माना जाता है और दक्षिण भारतीय त्योहारों, विशेष रूप से शादियों, बेबी शावर और अन्य पार्टियों में हे यह मुख्य व्यंजन पारंपरिक
भारत में मिठाइयों के राजा के रूप में हर जगह जाने जाना वाला, अपने छिद्रयुक्त घनी, फजी बनावट, शाही विरासत के लिए मशहूर,
बेसन, चीनी और घी से लबाबाब हे बेहद लजीज, मुलायम, मुंह में तुरन्त घुल जाती, लिए हुए खास तरह की खुशबू, गाढ़ा, मीठा टेक्सचर
मक्खन जैसा, विश्व की सर्वश्रेष्ठ मिठाइयों में चौदहवे स्थान पर, देशभक्ति और स्थानीय भावना को दर्शाने हेतु, मैसूर श्री रखा गया इसका नाम बदलकर
जहां कुछ लोगों ने इस बदलाव को सही माना ,वही अन्य लोगों ने दलील दी "पाक" खाना पकाने की विधि को संदर्भित कर मूल नाम को रखे बरकरार
शीघ्र ही आनंदायक ऊर्जा प्रदान कर, समग्र चयापचय क्रिया में सहायक, प्रोटीन और आवश्यक आहार फाइबर का अच्छा स्रोत, लंबे समय तक रहे तृप्त
उच्च कैलोरी और वसा वाला, इसलिए मधुमेह रोगियों के लिए नहीं उपयुक्त, चीनी और घी की मात्रा अधिक होने के कारण इसका सेवन करे सिमित