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WHEAT FLOUR ( A DIETARY STAPLE, HIGHLY VALUED FOR NUTRITIONAL PROFILE & VERSTALITY )
साबुत गेहूं का आटा हे भारतीय खान-पान का मुख्य हिस्सा का इस्तेमाल चपाती और रोज खाये जाने वाले परांठे में बड़े पैमाने पर किया जाता , मैग्नीशियम और पोटैशियम युक्त ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने में सहायक, धीरे-धीरे पचता है और लंबे समय तक पेट भरा हुआ महसूस कराता
अनाज के प्राकृतिक गुण बने रहते, पत्थर की चक्की में पीसने से, ज़्यादा प्रोटीन चाहने वाले लोग अक्सर फोर्टिफाइड करते पसंद,
रिफाइंड आटे की तुलना में विटामिन और मिनरल भरपूर मात्रा में, ज़रूरी ऊर्जा देता, जर्म, एल्ब्यूमिन और चोकर ( ब्रैन ) मौजूद
इसमें हे घुलनशील और अघुलनशील डाइटरी फाइबर, प्रोटीन, आयरन, जिंक, फोलेट, नियासिन, कई तरह के एंटीऑक्सीडेंट मात्रा में भरपूर
पोषक तत्वों की कमी को पूरा कर , इम्यूनिटी बढ़ाने, कब्ज से राहत दिलाने जैसे फायदे दे सकता गर लिया जाये तौर पर संतुलित आहार
जब आप इसमें पानी मिलाते हैं, तो ग्लूटेन बनने से आटा लचीला हो जाता, जिससे रोटियां (नैचुरल 'चुइंग गम') फूलती जैसे गुब्बारे,
भारत में मोहनजोदाड़ो और हड़प्पा की खुदाइयों से यह साबित हुआ कि पांच हजार से भी अधिक वर्षों से गेहूं खा रहे पूर्वज हमारे
PEARL MILLET FLOUR – BAJRA ( HIGHLY PRIZED IN INDIAN CUISINE, EXCELLENT SOURCE OF FIBER, IRON & PROTEIN )
बाजरे का आटा बहुत पौष्टिक, हड्डियों के स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद साबुत बाजरे के दानों को पीसकर बनता हे, को अंग्रेजी में कहते पर्ल मिलेट,
हल्के स्लेटी से स्लेटी-सफ़ेद रंग का, भरपूर मात्रा में इनसॉल्यूबल फाइबर होता , जो पेट के अच्छे बैक्टीरिया को पोषण दे तंदुरस्त बनाता हमारा गट गुनगुने पानी से गूंथकर इसको गेहूं के आटे के साथ मिला सकते, क्यूंकि यह भुरभुरा होता, और थपथपाने में न हो मुश्किल,
पराँठे बनाने के अलावा नमकीन चीज़ें मठरी या ढेबरा पारंपरिक भाकरी, दलिया, खिचड़ी, मीठी रबड़ी में होता इस्तेमाल
पोषक तत्वों को बनाए रख, हे कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स पर आयरन, मैग्नीशियम, जिंक और B-विटामिन हे काफी ज्यादा,
सर्दियों में अधिक खाये जाने वाला ( तासीर गर्म ) उरद की दाल साथ रोटी कॉम्बो कर इसका स्वाद हो जाता और भी उम्दा
खान पान का मुख्य हिस्सा , सौंधे स्वाद, भारीपन के लिए जाना जाता, हे बहुत ही पौष्टिक और प्राकृतिक रूप से ग्लूटेन-मुक्त अत्यधिक सेकने पर कभी ऐसा हो जाता की कैरम बोर्ड की स्ट्राइकर की तरह गोटिया पॉकेट में डाले हो सकता हे इतना सख्त
JOWAR ATTA ( A TRADITIONAL, NUTRIENT – DENSE WHOLE GRAIN FLOUR MADE FROM ANCIENT MILLET CROP SORGHUM BICOLOR )
ज्वार आटा, भारतीय और अफ़्रीकी खान-पान का अहम हिस्सा, जिसका स्वाद हल्का, मिट्टी जैसा, थोड़ा मीठा हे, बनाया जाता इसे पीसकर,
ग्लूटेन सेंसिटिविटी वाले लोगों के लिए बेहतरीन विकल्प, सबसे ज्यादा उपयोग होता फुलका बनाकर फूलाने में ( गेहू जैसी ) बिना खमीर
दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा अनाज, इसे 'ऊंट की फसल' भी कहा जाता, क्योंकि यह सूखे का सामना करने में हे सक्षम, " टैनिन " प्रचुर मात्रा में, इसके दाने इंसानों के खाने के अलावा, पौधे भी मवेशियों के पौष्टिक चारे के रूप में आते हे काम
आटा गूंथने के लिए आम तौर पर गर्म पानी का इस्तेमाल किया जाता, क्योंकि इससे स्टार्च नरम होकर, आकार देना हो जाता थोड़ा आसान,
एक नई गृहिणी को इसकी चपातियां बनाने के लिए थोड़ी ज्यादा प्रैक्टिस की ज़रूरत हो सकती, एक बेहद ही मुख्य घटक हे फ्लोर मल्टीग्रैन
गाढ़ा करने वाला पदार्थ, इसे नमकीन चीज़ें जैसे डोसा, थालीपीठ, दलिया और वीट-फ्री वाली बेक की गई चीज़ों की रेसिपी में मिलाया जा सकता,
एकदम गोल रोटी बेलने की कोशिश भूगोल का टेस्ट, डाइटरी फ़ाइबर, प्रोटीन, आयरन और मैग्नीशियम युक्त होने के कारण फायदेमंद माना जाता
FINGER MILLET FLOUR – RAGI ATTA ( HIGHLY NUTRITIOUS, NATIVE TO AFRICA & WIDELY USED IN SOUTH ASIA )
रागी का आटा हे ग्लूटेन-फ्री इसलिए सीलिएक बीमारी वालो के लिए एक उत्कर्ष्ट समाधान ,आयरन और डाइटरी फाइबर से हे भरपूर ,
डायबिटीज़ मरीजों हेतु अच्छा विकल्प, सभी अनाजों में हे इसमें सबसे ज़्यादा कैल्शियम अत: हड्डियों, दांतों को मज़बूत बनाने में मददगार
यह थोड़ा भारी हो सकता, इसलिए इसे बेक की हुई चीज़ें ( कुकीज़, केक ) बनाने के लिए खास तरीके से इस्तेमाल करना पड़ता,
मुड्डे, डोसे तैयार तो होते ही ,अक्सर इसे गेहूं के आटे के साथ मिलाते जिससे रोटी, परांठे का लचीलापन और टेक्सचर बेहतर हो जाता
रेगुलर वाला सीधे कच्चे और साफ़ किए गए दानों को पीसकर बनता, जबकि स्प्राउटेड में बीजो को भिगोने के बाद सुखाकर ग्राइंड किया जाता,
अपने प्राकृतिक गुणों के कारण इसकी लम्बी हे शेल्फ लाइफ, अंकुरित करने की प्रक्रिया से बढ़ जाती पोषक तत्वों के घुलने मिलने की क्षमता
इसमें अमीनो एसिड्स चेहरे पर आने वाले झुर्रियों को ऐसे रोकता, जैसे कि आपने अपनी उम्र को किसी टाइम मशीन में कर लिया हो कैद
तनाव और सिरदर्द छूमंतर हो जाता, ऑफिस में बॉस के डांटने पर भी रात को इसकी चपाती खाने से आपको आएगी प्यारी, सुकून भरी नींद
GRAM FLOUR – BESAN ( USED FOR THICKENING CURRIES, COATING FRITTERS, MAKING SAVORY BREAKFAST PANCAKES & TRADITIONAL SWEETS )
ग्राम फ्लोर चने की दाल को पीसकर बनाया गया एक बहुमुखी फ्लोर , जो प्लांट-बेस्ड प्रोटीन से हे भरपूर और कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स, प्राकृतिक रूप से ग्लूटेन-मुक्त, गाढ़ा करने के लिए इस्तेमाल होता, जी भर जाना का अहसास करा , करता हे मांसपेशियों का विकास
इसका उपयोग वैसे तो बहुत से देशों में होता, परन्तु भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश में भोजन के घटक के रूप में होता हे काफी अधिक, इसमें मौजूद फाइटोकेमिकल्स कोशिका सुदृढीकरण का काम करते, फॉस्फोरस और कैल्शियम भरपूर हड्डियों के निर्माण में हे सहायक इससे भजिया, ढोकला, कढ़ी, लड्डू, मैसूर पाक बनकर तो आपकी स्वाद कलिकाएं को तृप्त करते ही, साथ में गेहू के आटे का विकल्प हे उत्कृष्ट, फोलेट का उम्दा स्रोत मात्र सौ ग्राम में चार सौ mcg से भी अधिक , काफ़ी लोकप्रिय हे ( फेस पैक, स्क्रब ) त्वचा को करने के लिए एक्सफोलिएंट
यह मल्टीटास्किंग चैंपियन अर्थात दुनिया का अकेला ऐसा आटा, पेट में जाये तो गोटा-पकौड़ा, और चेहरे पर लगे तो उस पर भी ले आये निखार,
हे किचन का फेविकोल क्यूंकि गर पकोड़े बनाते समय आलू-प्याज और बेसन एक-दूसरे का साथ छोड़ दें तो यह तुरंत पकड़ लेता उस मिक्सचर
MAKKI KA ATTA – MAIZE FLOUR OR CORNMEAL ( HIGHLY NUTRITIOUS & NATURALLY SWEET, A STAPLE DURING WINTER ACROSS NORTH INDIA )
सर्दियों में खास तौर से उपभोग किये जाने वाला मकई का आटा सूखे साबुत मक्के के दानों से पीसकर तैयार होता रवादार ,
ग्लूटेन मुक्त, ऑर्गनिकम कॉर्न फ्लोर की चपाती बिना खमीर वाली हे एकदम देसी जिसे बनाते आमतौर पर हाथ से थपथपाकर
एंटी एजिंग, इसके पीले रंग में हे कैरोटीनॉयड ( ल्यूटिन ) , नियमित रूप से इसका सेवन करने से आंखों की रोशनी होती बेहतर,
भारत में बेहद क्रेज, खेती लगभग नौ हजार साल पहले मेक्सिको में शुरू हुई थी, फिर अमेरिकी महाद्वीप से फैलाई गयी दुनिया भर
मक्के की रोटी और 'सरसों का साग' बहुत सारे घी या मक्ख़न सहित परोसते, कचौड़ी, थेपला, भाकरी, पकौड़े का भी हो सकता यह घटक,
बेक करे या तले हुए नाचोस, टैकोस , राजस्थानी ढोकले के वास्ते उम्दा, के अलावा कोटिंग कर क्रिस्पी फ्रिटर्स पर क्रंची परत हे लाने लायक
ज़रूरी B-कॉम्प्लेक्स विटामिन, कार्बोहाइड्रेट, ओमेगा-6 फैटी एसिड का स्रोत तो हे ही, साथ में बीज ऐसे चुने जाते की पोषण मूल्य हो सर्वोत्तम ,
एनर्जी बूस्टर, फाइबर और पोटैशियम भरपूर मात्रा में सहायक हे ब्लड प्रेशर पर रखने में कंट्रोल ऐवम लो-डेंसिटी लिपोप्रोटीन को करता कम
JAU KA ATTA – BARLEY FLOUR ( VERSATILE NUTRIENT – DENSE POWDER, FOR THOSE SEEKING A FIBRE – RICH ALTERNATIVE TO REFINED WHEAT )
आयुर्वेद में औषधि मानते , जौ का आटा साबुत अनाज से बनता , जिसका स्वाद हल्का और थोड़ा नटी होता, हे पोषक तत्वों से भरपूर ,
"ब्लड शुगर" को अचनाक बढ़ने से रोकता ,खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद कर सकते, इसमें बीटा-ग्लूकेन, घुलनशील फाइबर
नरम चपातियों के लिए, गेहूं के आटे के साथ मिलाया जाता ( आमतौर पर 1:1 या 2:1 के अनुपात में ) क्यूंकि ग्लूटेन की मात्रा हे कम, ब्रांड और यह ऑर्गेनिक रूप से उगाया गया है या नहीं , के आधार पर कीमत सामान्यतः ₹65 से ₹200 के बीच होती प्रति किलोग्राम
बहुत ही शानदार नेचुरल बाइंडर, बी-विटामिन, सेलेनियम और आयरन से युक्त शरीर की इम्यूनिटी और एनर्जी लेवल को बेहतर बनाता ,
कुकीज़, मफ़िन, पैनकेक में हेल्दी होल-ग्रेन ट्विस्ट जोड़ने के लिए एक चौथाई तक मैदा की जगह " बारले का फ्लोर " इस्तेमाल हो सकता
जब आप केवल इसकी ही रोटी बनाएंगे तो आपके हाथों की अच्छी-खासी कसरत हो जाती, अत: हे यह एक तरह का वर्कआउट सम्पूर्ण,
गर तला-भुना खा लिया तो यह पेट में अटकी गैस को तो बाहर निकालता ही, वही बीयर का पुराना यार होने के चलते बनता मस्ती का कारण
BRAN ATTA – HIGH FIBER WHEAT FLOUR ( FOR WEIGHT MANAGEMENT, PROMOTES DIGESTIVE HEALTH, PREVENTS CONSTIPATION, CONTROLS BLOOD SUGAR )
ब्रैन आटा, या अघुलनशील फाइबर वाला गेहूं का आटा, आम आटे की तुलना में गेहूं की बाहरी परत का ज़्यादा हिस्सा हे रखता,
वज़न कंट्रोल के लिए बेहतरीन विकल्प प्रीबायोटिक के तौर पर काम करता क्यूंकि पेट के अच्छे बैक्टीरिया को बढ़ावा देता,
आटे का टेक्सचर खराब किए बिना रोज़ के खाने में फ़ाइबर की मात्रा बढ़ाते , सामान्य व्हीट के फ्लोर में शुद्ध गेहूं का चोकर मिलाकर ,
वही कई लोग नरम और सफ़ेद रोटी बनाने के लिए, सख्त, रेशेदार बाहरी छिलका भूसी जो हे हेल्थी उसी को अलग कर देते छानकर
( खराब ) कोलेस्ट्रॉल, ट्राइग्लिसराइड का स्तर कम होता, नियासिन, थायमिन का अच्छा स्रोत, मदद करते मेटाबॉलिज़्म और दिमाग के कामकाज,
ब्लोटिंग की समस्या नहीं होती , ज़्यादा खाने पर रोक लगा, छोटी आंत में ग्लूकोज़ के अवशोषण को धीमा कर , वरदान हे डायबिटीज के मरीज
सदियों तक चोकर केवल पशु आहार के लिए उपयोग होता था, लेकिन मनुष्य ने भी अपनी तंदुरस्ती के लिए अपनी डाइट में किया इसे शामिल,
फाइटिक एसिड जैसे एंटीऑक्सीडेंट युक्त, यह वह सख्त छिलका हे, जिसे लोग बेकार समझकर फेंक देते यही आपका वजन घटाने के काबिल