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SPINACH ( HIGHLY NUTRITIOUS LEAFY GREEN VEGETABLE, CAN BE CONSUMED RAW OR COOKED )
पालक हे एक अत्यंत पौष्टिक सब्ज़ी, हल्की होने पर भी, आयरन, विटामिन ए, सी, के, फोलेट मैग्नीशियम, फाइबर से भरपूर,
कम कैलोरी वाला सुपरफूड, सहयोग करता पाचन, आंखों की रोशनी, ब्लड प्रेशर और हड्डियों के स्वास्थ्य में लाता सुधार
साधारण सलाद से लेकर साग, पनीर, पेस्टो और क्रीमी डिप्स जैसे पके हुए व्यंजनों तक इसका उपयोग होता हे व्यापक, हीमोग्लोबिन का उत्कृष्ट स्रोत ,प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत और सक्रिय बनाए रखता, त्वचा की मरम्मत में भी हे सहायक
यह पत्तेदार हरी सब्जी की खेती मुख्य रूप से इसके कोमल और रसीले पत्तों के लिए की जाती, इसका औषधीय महत्व हे काफी अधिक,
नरम और मीठे स्वाद वाले ताज़े पालक का इस्तेमाल करें, क्यूंकि यह कड़वा हो सकता उच्च मात्रा होने के कारण एसिड ऑक्सालिक
सर्वोत्तम पोषण मूल्य के लिए इसे कच्चा या हल्का पकाकर खाएं, वजन नियंत्रण में और हृदय स्वास्थ्य को दुरुस्त करने में मदद करता,
कोलेस्ट्रॉल को कम करता, हे कई एंटीऑक्सीडेंटस का पावरहाउस, ब्रोकोली की तुलना में चार गुना अधिक बीटा कैरोटीन होता
CAULIFLOWER ( KNOWN FOR ITS DENSE, WHITE EDIBLE HEAD SURROUNDED BY GREEN LEAVES )
ब्रैसिकेसी परिवार की ग्लूटेन-मुक्त एक अत्यंत पौष्टिक और बहुमुखी क्रूसिफेरस सब्जी है, फूलगोभी ब्रोकोली और केल से संबंधित,
दही जैसा सफ़ेद रंग भूमध्यसागरीय क्षेत्र से उत्पति हुई ठंडे मौसम की फसल, मुख्य रूप से इसका उत्पादन होता चीन और भारत
इसके लोकप्रिय उपयोग में शामिल हे भूनना, भाप में पकाना, सलाद में कच्चा खाना, "फूलगोभी चावल", भरमा परांठे के लिए करे कद्दूकस, इसमें मौजूद फोलेट नई कोशिकाओं का करती निर्माण, हे इसमें मुख्यत पोटेशियम, मैंगनीज, थोड़ी मात्रा में कैल्शियम, आयरन जैसे मिनरल्स
सब्ज़ी के अलावा इसे स्वस्थ आहार में चावल, पिज्जा क्रस्ट और मैश किए हुए आलू के कम कार्बोहाइड्रेट विकल्प के रूप में किया जाता इस्तेमाल,
पनपने के लिए नम, नाइट्रोजन युक्त मिट्टी की आवश्यकता होती, रोपण के 60-100 दिन बाद, इसके सिर आमतौर पर कटाई हेतु हो जाते काबिल
बैंगनी, नारंगी, हरे रंग की किस्मों में भी उपलब्ध एक कप फूलगोभी में होता केवल 25 कैलोरी, 5 ग्राम कार्बोहाइड्रेट, 2 ग्राम आहार फाइबर
अन्य स्वादों को आत्मसात करती यह विटामिन सी ( प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करने वाला ) विटामिन के ( हड्डियों के स्वास्थ्य के लिए ) से भरपूर
CARROT ( RENOWED FOR ITS CRUNCHY TEXTURE AND HIGH BETA – CAROTENE CONTENT )
ठंडे मौसम में उगने वाली सब्जी है जो ढीली, रेतीली मिट्टी में सबसे अच्छी तरह से बढ़ती ( वैज्ञानिक नाम डौकस कैरोटा ) हे गाजर, फाइबर, एंटीऑक्सीडेंट और पोटेशियम से भरपूर, यह आंखों के स्वास्थ्य, रोग प्रतिरोधक क्षमता और पाचन क्रिया को बनाती बेहतर
श्रेष्ठ पोषण मूल्य, यूरोप और दक्षिण-पश्चिम एशिया में हुई इसकी उत्पत्ति, ऑरेंज की किस्म 17वीं शताब्दी में प्रफुल्लित की गयी नीदरलैंड, यह द्विवार्षिक पौधा हे, मतलब दो साल में अपना जीवन चक्र पूरा करने वाला पहले में खाने योग्य जिसे हम खरीदकर खाते बनती हे जड़
शर्करा की मात्रा काफी होने के बावजूद आंखों की रोशनी बढ़ाती ,लो-डेंसिटी लिपोप्रोटीन कम करती, फ्री रेडिकल्स हेतु ढाल प्रतिउपचायक,
नारंगी, पीले, सफेद, लाल, बैंगनी रंग में विकसित, इसे सलाद में कच्चा, सूप,आलू के साथ पकाकर या जूस के रूप में इसके उपयोग हे व्यापक
इतना ही नहीं, भारतीय शीतकालीन व्यंजनो में रेड कैरट का हे दबदबा, डेसेर्ट या मीठे में बना सकते हलवा, बर्फी, केक, खीर
वेट मैनेजमेंट में सहायक, स्किन को ग्लो प्रदान करती बेहतरीन , हे नेचुरल एंटी एजिंग, साथ ही हे रक्त शोधक शानदार
KARELA ( TROPICAL NUTRIENT-DENSE VINE, INTENSELY BITTER TASTE )
करेला अत्यधिक पौष्टिक और औषधीय गुणों वाली हरी सब्जी है, जिसका वैज्ञानिक नाम मोमोर्डिका चारेंटिया , विटामिन, एंटीऑक्सिडेंट्स से भरपूर, अच्छी सेहत के लिए अनेक फायदे होने के बावजूद, इसके तेज, कड़वे स्वाद और उनके प्रति संवेदनशीलता के कारण बच्चे इसको खाने से रहते हे दूर
इसमें 'पॉलीपेप्टाइड-पी' नामक तत्व , इंसुलिन की तरह काम करके ब्लड शुगर लेवल को कम करने में सहायक,
फाइबर की अच्छी मात्रा होने के चलते पाचन क्रिया दुरुस्त रहती , साथ ही कब्ज से राहत दिलाने के भी लायक
बंगाली में करोला, तमिल में पावक्कई और तेलुगु में कहते इसे काकरकाया, संकरे, पतले सिरे, खुरदरे, नुकीले, दांतेदार कांटे हे इसके प्रकार भारतीय
बेजोड़ पोषण क्षमता, इसके विशिष्ट गुण एक अद्वितीय "बायोकेमिकल कॉकटेल" से आते हैं जो अन्य सब्जियों में नहीं मौजूद, इसलिए हे यह अतुलनीय
इसका बीज व गूदा अलग किया जाता नमक के पानी में भिगोकर या प्याज के साथ पकाया जाता है कम करने के लिए कसैलापन,
अधिकतम स्वास्थ्य लाभ उठाये, गुड़, इमली, दही के साथ या पसंदीदा व्यंजनों में मिलाकर खाये ताकि न्यूनतम हो जाये कड़वापन
RIDGE GOURD – TURAI ( HIGHLY DIGESTIBLE LOW CALORIE SUMMER PRODUCE )
तुरई, खीरे के परिवार की पौष्टिक, कम कैलोरी वाली उष्णकटिबंधीय सब्जी, जिसकी पहचान हे गहरे हरे छिलके, उभरी हुई खड़ी धारिया,
टेस्ट लाने के लिए टमाटर प्याज के साथ मसाले वाली, भरवा, इत्यादि तरीके से बनाई जाती, उपयोग करते करी, फ्राई, दालों व्यंजन एशिया उच्च फाइबर और अधिकाँश भाग 90% पानी युक्त होने के कारण कब्ज से बचाकर,पाचन में हे सहायक और रखती हमे हाइड्रेटेड,
पारंपरिक रूप से रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित करने में हे मददगार क्यूंकि इसमें हे मौजूद इन्सुलिन जैसे पेप्टाइड और एल्कलॉइड
आयरन, मैग्नीशियम और पोटेशियम भरपूर, तेलगु में बीरकाया, तमिल में पीरकंगई, गुजरात में तुरिया, बंगाली में झिंगे हे क्षेत्रीय नाम,
विटामिन ए, सी और बी-कॉम्प्लेक्स पर्याप्त मात्रा में होने से रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने, त्वचा को जवां बनाये रखने में आती काम
लुफ्फा एक्यूटैंगुला इसका वैज्ञानिक नाम की उत्पत्ति भारतीय उपमहाद्वीप में हुई, विश्व भर में फैली इसे प्राथमिक केंद्र माना जाता फसल की विविधता , भारत, पाक, बांग्लादेश में तो इसे चाव से खाते परन्तु अमेरिका में प्राकृतिक रूप से पाए जाने के बावजूद वहाँ उतनी नहीं इसकी लोकप्रियता
CAPSICUM ( SCIENTIFIC GENUS OF ALL PEPPER PLANTS )
सोलानेसी फैमिली की एक पौष्टिक और स्वादिष्ट फल, सब्जी की तरह इस्तेमाल करते, बेल पेपर्स या शिमला मिर्च के नाम से मशहूर हे भारत,
कई रंगों में आने वाली हरी का टेस्ट हल्का कड़वा, पीली और नारंगी थोड़ी मीठी, लाल में सबसे ज्यादा मिठास, इसका रंग हे स्वाद का संकेत
ताजगी के लिए प्लास्टिक बैग में डाल फ्रिज के वेजिटेबल क्रिस्पर ड्रॉअर में रखें, कच्चा (सलाद में) या पकाकर (फ्राई, करी ) खाया जा सकता,
वेजिटेबल जैसे आलू-शिमला मिर्च, मिक्स वेज बनाने के अलावा, चाइनीज़, कॉन्टिनेंटल डिश चाउमीन, पिज़्ज़ा, पास्ता में भी इसका उपयोग होता
हृदय स्वास्थ्य में सुधार होता, वजन नियंत्रण में सहायक, एंटीऑक्सिडेंट्स त्वचा की बनाये रखते चमक, बीटा कैरोटीन हे आँखों हेतु लाभदायक,
इसमें 'कैप्साइसिन' नामक तत्व में एंटी इंफ्लेमेटरी गुण होते , विटामिन C युक्त होने से संक्रमण से बचाती और बढ़ाती क्षमता रोग प्रतिरोधक
हरी मिर्च की रिश्तेदार, जिसकी खेती छह हजार से भी अधिक वर्षो से हो रही , मूल रूप से अमेरिका के उष्णकटिबंधीय क्षेत्र का पौधा हे कैप्सिकम,
पुर्तगाली, स्पेनिश व्यापारियों ने इसके बीजों को तेजी से पूरी दुनिया में फैलाया, जिससे दक्षिणपूर्व एशिया, इंडिया में समाहित होने का हो गया काम
CORIANDER LEAVES ( DIETARY STAPLE USED GLOBALLY FOR GARNISHING & FLAVOURING )
धनिया ( जिसे सिलेंट्रो भी कहते ) कोरिएंड्रम सैटिवम पौधे की ताज़ी पत्ती, जो होती सुगंधित, इस्तेमाल की जाती करने के लिए गार्निश,
इसकी चमकदार हरी, जालीदार पत्तियां, गाढ़ी करी, सूप और सलाद को और टेस्टी बना, रेस्टोरेंट जैसा लुक देकर लाती आकर्षक फिनिश
हरी चटनी, मैरिनेड और मैक्सिकन पिको डी गैलो में एक मुख्य सामग्री, इनके नाजुक, ताज़े स्वाद को बनाए रखने के लिए डाले बिल्कुल अंत, रोग प्रतिरोधक क्षमता और त्वचा के स्वास्थ्य को बढ़ावा देता, रक्त शर्करा को नियंत्रित, पाचन क्रिया को बेहतर बना, करता उसे नियमित
कुछ स्टेप्स फॉलो कर आसानी से घर पर उगाये , सूखे धनिये के साबुत बीजों को हल्के मसलकर तोड ले, फिर उसे रात भर पानी में रखे भिगोकर,
तदुपरान्त जल निकासी वाली मिट्टी में लगाएं उसे प्रतिदिन कुछ घंटे धूप दिखाए ,पौधा छह इंच लम्बा होने पर बाहरी पत्तियों काटे आवश्यकतानुसार
हर भाग खाने योग्य होता, पत्तियों के अलावा, बीज मसाले के रूप में काम आते , जड़ें पेस्ट और शोरबे के लिए प्रदान करती गहरी सुगंधित आधार
दैनिक आहार का बहुत ही पौष्टिक हिस्सा एक औधषि भी हे , कई रोगों की रोकथाम तो करता ही साथ ही उपयोग होता कई बीमारियों के उपचार