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KASHI VISHWNATH TEMPLE ( KEY SITE FOR HINDU PILGRIMAGE & MOKSHA )
भगवान शिव को समर्पित वाराणसी में स्थित काशी विश्वनाथ मंदिर हिंदू धर्म के सबसे स्थल पवित्र,
प्राचीन काशी शहर से जुड़ाव और "ब्रह्मांड के स्वामी" से आशीर्वाद प्राप्त करने वाले भक्तों के लिए प्रसिद्ध सर्वत्र
इस मंदिर में दर्शन करने के लिए आदि शंकराचार्य, सन्त एकनाथ, गोस्वामी तुलसीदास सभी का हुआ आगमन,
त्योहारों और सप्ताहांतों के दौरान यह संख्या बढ़कर लाखों तक पहुंच जाती इसलिए दर्शन करने पड़ते आनन फानन
इसका कोर्रिडोर तीर्थयात्रियों का अनुभव बेहतर बनाता ,विश्वेश्वर हैं और बारह ज्योतिर्लिंगों ( प्रकाश के अवतारों ) में से एक को करता धारण,
महाराजा रणजीत सिंह द्वारा दान किए गए एक टन सोने का उपयोग शिखर पर सोने की परत चढ़ाने के साथ ही तीन गुंबदों का किया निर्माण
माता पार्वती की इच्छा पर काशी को निवास स्थान बनाया जो भारत की आध्यात्मिक राजधानी भी हे शिवजी ने भिड़ाई युक्ति,
ज्ञान और कला का केंद्र ऐसी मान्यता हे कि यहां दर्शन और गंगा स्नान से मोक्ष मिलता, और जीवन-मृत्यु के बंधन से प्राप्त होती मुक्ति
SUN TEMPLE KONARK ( BUILT AS SURYA’S CHARIOT THAT FUNCTION AS SUNDIALS )
भारत के ओडिशा राज्य में स्थित कोणार्क का प्रसिद्ध मंदिर , यूनेस्को विश्व धरोहर हे और सूर्य देवता के विशाल रथ के रूप में हे निर्मित,
वर्ष के महीनों का प्रतिनिधित्व करने के लिए बारह जोड़ी पहिए लगे हुए हे, वही सात घोड़े सप्ताह के दिनों की संरचना को करते प्रतीत
दीवारों पर देवी-देवताओं, जानवरों, संगीतकारों और दैनिक जीवन के दृश्यों की विस्तृत है नक्काशी, प्राचीन भारत की कलात्मक और इंजीनियरिंग कौशल का प्रमाण होने के चलते यह लायक हे शाबाशी
कलिंग वास्तुकला की एक उत्कृष्ट कृति, पुरी से 35 किमी दूर समुद्र तट के निकट बना हुआ जाना जाता हे इसे "काला पैगोडा"
कभी भारत की सबसे ऊंची पवित्र संरचनाओं में से एक काफी ऊंचाई तक पहुंचने वाले पर विराजमान हे सौ फुट रथ बड़ा
अपनी कल्पना, आकार, अनुपात तथा मूर्तिकला की श्रेष्ठ कथात्मक शक्ति के कारण मंदिर वास्तुकला और कला का हे विशिष्ट उदाहरण
देवत्व के मानवीकरण का एक स्मारकीय प्रतीक, जो सूर्य देव की पूजा के प्रसार के इतिहास में एक अमूल्य कड़ी का करता निर्माण
SOMNATH TEMPLE ( MOST REVERED ANCIENT PILGRIMAGE SITE KNOWN AS SHRINE ETERNAL )
सोमनाथ मंदिर अरब सागर के तट पर स्थित जाना जाता हे अपनी ऐतिहासिक भव्यता और पौराणिक महत्व,
कई बार आक्रमणों के बाद भी अपनी अटूट विश्वास की शक्ति के साथ खड़ा का निर्माण किया स्वयं चंद्रदेव
चालुक्य शैली में बना भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों में पहला, है महत्वपूर्ण विश्व प्रसिद्ध धार्मिक पर्यटन स्थल,
अपनी ऐतिहासिक भव्यता के लिए मशहूर वर्तमान भवन का पुनर्निर्माण करवाया लौहपुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल
इसके पास हिरण, कपिला और सरस्वती तीन नदियों का त्रिवेणी संगम होता है, जो इसे बनाता है और भी निर्मल
शिवरात्रि व कार्तिक पूर्णिमा पर विशेष आयोजन, भजनों की गूंज और सुबह से ही शुरू हो जाती श्रद्धालुओं की हलचल,
"शाश्वत तीर्थ," इसके नीचे तीन मंज़िला संरचना में मिले हे, लगभग बत्तीस खंभे, पाँच कक्ष और प्राचीन बौद्ध गुफाओं के प्रमाण
इसका निर्माण सबसे पहले चंद्रमा देवता ( सोम ) ने सोने से करवाया , बाद में रावण ने चांदी से, ऐवम लकड़ी से भगवान कृष्ण
MEENAKSHI TEMPLE ( MASSIVE ANCIENT HINDU TEMPLE COMPLEX, VIBRANT, INTRICATE SCULPTURES )
मीनाक्षी मंदिर की हैं अद्भुत द्रविड़ वास्तुकला, हजारों जीवंत मूर्तियों से सजे चौदह विशाल गोपुरम, संगीतमय स्तंभों वाला अद्वितीय हजार स्तंभ हॉल
तमिलनाडु में वैगई नदी पर स्थित प्रसिद्ध है अपनी जटिल कलाकारी, नक्काशी में चित्रित समृद्ध पौराणिक कथाओं और पवित्र स्वर्ण कमल तालाब
यह एक ऐतिहासिक मन्दिर जो हे ढाई हजार वर्ष पुराना तमिल भाषा के गृहस्थान मदुरई नगर, की है जीवनरेखा, एक प्रसिद्ध हॉल,अयिरामकल मंडपम परिष्कृत शिल्पकारी सहित प्रत्येक स्तंभ प्रतीत होता जैसे एक सीधी रूपरेखा
इस मन्दिर से जुड़ा़ सबसे महत्वपूर्ण उत्सव है जिसका आयोजन चैत्र मास (अप्रैल के मध्य) में होता है मीनाक्षी तिरुकल्याणम,
तमिल महीने के शुक्रवार बडे़ हर्षोल्लस के साथ मनाए जाने के अलावा हिन्दू उत्सव जैसे नवरात्रि एवं शिवरात्रि पर भी रहती धूम धाम
इसमें लगभग हज़ार जटिल निर्मित स्तम्भों से बना एक वास्तुशिल्प चमत्कार, जिनमे से प्रत्येक अनोखा है, प्रस्तुत करता एक अद्भुत दृश्य,
इस जुड़वां मंदिर में भगवान शिव अपने सुंदरेश्वर अवतार में विराजमान हैं, अपनी पत्नी मीनाक्षी के साथ ही उनको समर्पित जिसके नेत्र हे तरह मत्स्य
RANAKPUR JAIN TEMPLE ( PREMIER WHITE MARBLE COMPLEX KNOWN FOR INTRICATE CARVINGS )
राणापुर जैन मंदिर अपनी अद्भुत पन्द्रहविह शताब्दी की वास्तुकला के लिए विशेष है, जिसमें हे संगमरमर के 1,444 स्तंभ जो हे अद्वितीय रूप,
पौराणिक दृश्यों और दिव्य प्राणियों को दर्शाने वाले, अलंकृत गुंबदों और हॉलों को सहारा देते प्रकाश और छाया का जटिल खेल बनता फलस्वरूप
आप मंदिर में किसी भी कोने से देखें, मुख्य मूर्ति के दर्शन में कोई खंभा बाधा नहीं डालता हे इसकी खासियत, पाली, राजस्थान में स्तिथ इनको इस तरह से डिजाइन किया गया है कि दिन भर रंग होता रहता परिवर्तित
जैन वास्तुकला के सबसे प्राचीन उदाहरण भारतीय शिला-काट वास्तुकला के हैं, जिसमें ठोस चट्टान से संरचनाएं बनाई जाती सामग्री को तराशकर,
भव्य मंदिर परिसर 48,000 वर्ग फुट क्षेत्र में फैला हुआ हे ,जिसमे पॉंच प्रमुख शिखर, अस्सी गुंबद और चौबीस मंडप का हे चतुर्मुखी आकार
अपने आप में एक वास्तुशिल्प चमत्कार,इसको बनवाया घनेराव के एक पोरवाल धन्ना शाह ने मेवाड़ के तत्कालीन शासक राणा कुंभा के संरक्षण,
अद्भुत आकर्षण, यह आध्यात्मिक शांति और ध्यान के लिए है उत्तम, मगही नदी के किनारे और अरावली की पहाड़ियों के बीच होने के कारण
SHIRDI SAI BABA TEMPLE ( SACRED FINAL RESTING PLACE OF SPIRITUAL SAINT )
शिरडी साई बाबा मंदिर महाराष्ट्र में स्थित एक प्रसिद्ध और पवित्र तीर्थस्थल है, जो 19वीं शताब्दी के पूजनीय संत साई बाबा को है समर्पित,
प्रमुख प्रसाद में नारियल, फूल ( मालाएं ), मिठाई ( हलवा ) और खिचड़ी जैसे पौष्टिक खाद्य पदार्थ ,जो हे उनके मनपसन्द किये जाते अर्पित
जगद्गुरु के कारण शिरडी भारत में एक विख्यात पर्यटकों के लिए धार्मिक जगह हे, प्रतिवर्ष लाखों श्रद्धालुओ को आकर्षित कर अत्यंत लोकप्रिय, मंदिर शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और आपदा राहत सहित कई धर्मार्थ कार्यों में भी सहयोग करता जिससे चिंतामुक्त रहते लोग स्थानीय समुदाय शीर्ष दान प्राप्त मंदिर में से एक सभी धर्मों के अनुयायी पूजते मंत्रमुग्ध होते सफेद संगमरमर की मूर्ति और पवित्र समाधि के हेतु दर्शन , मुख्य संरचनाएं हे द्वारकामाई में शाश्वत अग्नि ,चावड़ी: वह स्थान जहाँ बाबा सोते थे, पहली बार युवा तपस्वी के रूप में प्रकट हुए गुरुस्थान सबका मालिक एक को मानने वाले के पूजागृह में पाँच बार आरती होती है, जो अद्भुत नज़ारा पेश करती है साई के प्रति प्रेम और भक्ति,
पवित्र राख से रोगो का उपचार करना, बारिश या आग जैसी चीजों को नियंत्रित करना, विभिन्न रूपों में दर्शन देने की थी उनमे चमत्कारिक शक्ति