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मार्च अप्रैल के नवरात्रे आते होली के बाद,
माता के दरबार में लेकर आते सब अपनी फ़रियाद
नवरात्री की आप सबको बहुत बहुत शुभकामनाए
माँ दुर्गा पूरी करे आपकी सभी मनोकामनाएं
पहले दिन वक़्त लगता पूजा की करने में तैयारी,
कलश, माँ दुर्गा मूर्ती स्थापित करने से लेकर रखनी होती अज्ञारी
नवदुर्गा नवरात्रे में धरती पर जाती पधार,
करने को सबका उद्धार इस वक़्त तो हे उनके अलग ही ठाठ, घर मे औरते करती दुर्गा चालिसा का पाठ
तीसरा दिन हे चंद्रघंटा जो दर्शाता उनका रूप दिव्य, शेर पर सवार उनकी शक्ति अलौकिक होने के साथ साथ हे अद्वितीय
Navratri
आते हैं नवरात्रे साल मे दो बार
यह तो हे साक्षात देवी जी का अवतार,
जगह जगह आयोजित होते देवी जागरण
दुर्गा माता कर लेती सबके दुखो का हरण
ब्रह्मचारिणी माता के नौ रूपों में से हे दूजा, इस दिन खोये की बर्फी अर्पित करके करनी होती पूजा
जगदम्बा माँ के अलग अलग पहलुओं की हे अपनी अपनी महत्वता,
कुष्मांडा हे चौथा रूप जिन्हे मानते हे इस सृष्टि की रचयिता
मालपुऐ या लड्डू का लगाना होता भोग,
धन और शक्ति प्रदान करती और दूर भगाये रोग
इन दिनों घर में जलाये आप अखंड ज्योति,
घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता और बुरी शक्तियो से रक्षा करती
कलोनियों में नवरात्रो के दिनों में ढोल मंजीरों के साथ हर रोज कीर्तन से औरते माँ को मनाती
माता रानी भी सब पर अपना भरपूर आशीर्वाद बरसाती
पाँचवे दिन आराधना होती माता स्कन्द,
अपने चार हाथो में ही कमल का फूल और कार्तिकेय को उठाकर भी मुस्कुरा रही मन्द मन्द
प्रतीक हे यह मातृत्व, सुरक्षा और शक्ति
जिस पर देवी आ जाए तो यह दर्शाता वो हे अति उत्साहित
नवरात्रे में व्रत रखकर लेना होता विटामिन्स और फाइबर से भरपूर सात्विक भोजन, चुस्ती, फुर्ती बनाये रखने के लिए और कोशिकाओं को फिर से नवीनीकृत करने के लिए हे यह प्रयोजन
छठा दिन हे माँ कात्यायनी,
लाल रंग हे इनको सुहानी
बैजनाथ हे इनका सबसे प्रिय और सुख धाम,
बुराइयों का नाश करने और बाधाओं को दूर करने के लिए लेते इनका नाम
अन्धकार से उजाले की तरफ ले जाने वाली दुर्गा माँ का सातवाँ रूप हे कालरात्रि,
ॐ कालरात्र्यै विद्महे, श्मशानवासिन्यै धीमहि, तन्नो काली प्रचोदयात् हे इनका मंत्र गायत्रि
उनका यह अवतार हे तो सबसे डरावना,
फिर भी उनकी अर्चना होती सम्पूर्ण भावना
भक्तगण अपनी ख़ुशी जाहिर करते करके दूर्गा माँ के सामने नृत्य,
इसके सामान कुछ भी नहीं हे तुल्य
दुर्गा अष्टमी और नवमी को छोटी छोटी कन्याओं को कुछ प्राप्ति की रहती आस,
माना जाता उनमे हे दुर्गेश्वरी के नौ रूपों का हे वास
हलवा, चने पूरी का वितरित होता प्रसाद,
देवी जी का भोग लगाकर बढ़ जाता उसका स्वाद
भगवती जी फिर से आने का वादा कर सबकी भेट स्वीकारती,
इसी के साथ होती नवरात्रि की समाप्ति